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अमरकांत
1 जुलाई, 1925 को ग्राम नगरा, जिला बलिया, उत्तर प्रदेश - निधन- 17 फरवरी 2014
१९४१ में गवर्नमेंट हाई स्कूल, बलिया से हाई स्कूल। कुछ समय तक गोरखपुर और इलाहाबाद में इंटरमीडिएट की पढ़ाई, जो १९४२ के स्वाधीनता-संग्राम में शामिल होने से अधूरी रह गई, और अंतत: १९४६ में सतीशचंद्र कालेज बलिया से इंटरमीडिएट किया। १९४७ में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए.
कहानी-लेखन

1948 में आगरा के दैनिक पत्र 'सैनिक' के संपादकीय विभाग में नौकरी। आगरा में ही प्रगतिशील लेखक संघ में शामिल और कहानी-लेखन की शुरूआत। इसके बाद दैनिक 'अमृत पत्रिका' इलाहाबाद, दैनिक 'भारत' इलाहाबाद तथा मासिक पत्रिका 'कहानी' इलाहाबाद के संपादकीय विभागों से संबद्ध

कहानी संग्रह-

  • 'जिन्दगी और जोंक'
  • 'देश के लोग',
  • 'मौत का नगर',
  • 'मित्र-मिलन' और
  • 'कुहासा'

उपन्यास-

  • 'सूखा पत्ता',
  • 'आकाशपक्षी',
  • ' काले-उजले दिन',
  • 'सुखजीवी',
  • 'बीच की दीवार',
  • 'ग्राम सेविका',
  • 'खुदीराम' और
  • 'सुन्नर पांडे की पतोहू'

बाल-उपन्यास

  • 'वानर-सेना'
  • अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता ('कहानी' मासिक द्वारा आयोजित) में 'डिप्टी-कलक्टरी' कहानी पुरस्कृत
  • "इन्हीं हथियारों से" उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा व्यास सम्मान से सम्मानित
  • ज्ञानपीठ, सोवियत लैंड नेहरू और व्यास सम्मान से अंलकृत
'मनोरमा' इलाहाबाद के संपादकीय विबाग से अवकाशप्राप्त।
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