बाल्यावस्था जीवन की वह स्वर्णिम अवस्था है, जिसे बच्चों को छोड़कर सभी लोग पसंद करते हैं। केवल बच्चे ही बच्चे नहीं रहना चाहते, शेष सब लोग बच्चे बन जाना चाहते हैं।

यह वह दौर था, जब आदमी और कुत्तों का फ़र्क लगातार कम होता जा रहा था। कुत्तों का सम्मान बढ़ता जा रहा था और आदमी की मर्यादा टूटती जा रही थी।

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