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डॉ. पुष्पलता

परिचय
नाम
डॉ. पुष्पलता
कार्यक्षेत्र
मुख्य सम्पादक "आखर-आखर"
संपर्क सूत्र
पता
253-ए, साउथ सिविल लाइन
शहर / जिला
मुजफ्फरनगर
पिनकोड
251001
देश
भारत
आखर-आखर में प्रकाशित रचनाएं
तिरने के दिन
कविता / ग़ज़ल

आये फिर लहरों में तिरने के दिन घोल रही मधुगन्धा मदमाते घोलइच्छाएँ घूम रहीं बाँध-बाँध टोलपल्लव से अंतर के चिरने के दिन

उदास पानी
कविता / ग़ज़ल

रंग सारे उदास पानी के,बस रहें आस-पास पानी के। ओक भी है उदास औ' लब भी,प्यास बैठी है पास पानी के।

"पृथ्वी पर नारायण" डॉ. पुष्पलता का व्यंग्यात्मक उपन्यास है. अपने संप्रेषण को अधिक मारक बनाने के लिए साहित्यकार अभिधा की अपेक्षा लक्षणा और व्यंजना का अधिक प्रयोग करता है. इस पुस्तक की रचनाकार ने पृथ्वी की (मुख्या रूप से भारतवर्ष की) अनुशासन हीनता, अराजकता, स्वर्त्पर्ता, क्रूरता, भ्रष्टाचार आदि...

अनेक बार "दुक्खम-सुक्खम" पढ़ने की इच्छा हुई क्योंकि जिस कृति को व्यास पुरस्कार मिला वह निश्चित ही अद्भुत होगी इसकी उम्मीद थी। गूगल पर सर्च की नहीं मिली तो ममता कालिया दी से ही पूछा। पता चला प्रतिलिपि डॉट कॉम पर है ।पढ़ना शुरू किया तो लगा ये तो मेरी कहानी शुरू हो गई है।

प्रखर अनुभूतियाँ लिए गर्मजोशी, उतेजना, गहरी भावुकता से अपनी बात कहता है नवगीत। इसमें सहज मार्मिक संवेदना होती है। नवगीत प्रकृति और आधुनिकता से प्रेरणा प्राप्त करता है। कौंधती स्मृतियों के जरिये बिम्ब गहरे उतर जाते हैं मन में।

प्रेम चंद ने सही कहा था "कहानी वह ध्रुपद की तान है जिसमें गायन महफ़िल शुरू होते ही अपनी प्रतिभा दिखा देता है।" मुझे तेजेन्द्र शर्मा की कहानियाँ पढ़ने का अवसर मिला।

"भोर विभोर" अनिता सक्सेना जी का अनुभवों, सुखों दुखों की भावभूमि पर रचा रचना संसार है। जीवन को भोर के रूप में आत्मसात करने वाली रचनाकार की रचनाएँ वास्तव में भाव विभोर करती हैं, उनकी रचनाओं में ऊर्जा, उमंग, मानवीयता है।

डॉ. सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास 'नक़्क़ाशीदार केबिनेट' पढ़ा। स्त्री अस्मिता पर जैसे सम्वेदनाओं की नक़्क़ाशी जड़ दी है। पुस्तक हाथ में लेने के बाद पाठक को पकड़ लेती है। बिना पूरी पढ़े वह उसे रखता नहीं है।

एक 93 साल के व्यक्ति ने विदेश में किताब निकाली। एक 95 साल के व्यक्ति ने मेरठ में निकाली। विदेश में किताब निकालना बहुत बड़ी बात, वहाँ सब किताब प्रेमी हैं, बच्चे किताबों के लती बनाए जाते हैं।

कई महीने से रखी आदरणीय वेद प्रकाश "वटुक "की पुस्तकें पढ़ना चाह रही थी। मगर व्यस्त रही। आज उनकी एक कृति "शहीद न होने का दुख" पढ़ी। वेद प्रकाश 'वटुक' जी के पास कल्पनाओं का बहुत बड़ा आकाश है।

आलेख और अधिक ...

सम्पादक मंडल

मुख्य सम्पादक : कंचन गुप्ता
सह सम्पादक : राज लक्ष्मी दूबे
प्रबंध सम्पादक : अंकित राज

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