राम का नाम आज आडम्बरों के शोर से आच्छादित है। नीति, नीयत और निहितार्थ का विमर्श बेमानी है। जो मंदिर बन रहा है, वह दशरथ पुत्र राम का है। इसमें वाल्मीक, तुलसी, अनेकानेक भाष्यकारों के राम सिरे से गायब हैं।

इतिहास बोध हमे हमारे समय को समझने के लिए शिक्षित करता है। हम बहुत पुराने समय को सर पर ढोने को अपना गौरव समझते है। जबकि बिल्कुल पास का समय ही हमें प्रभावित करता है।

साहित्य संस्कृति का दर्पण है। इसी सूक्ति को ध्यान में रखते हुए हिन्दी कविता हमेशा से ही हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का अनुपालन करती रही है। यह और बात है कि इन सिध्दांतों की आड़ में काव्य के मूल सिद्धांत और स्वयं कविता भी 'गहरे अर्थों में' बैकुण्ठवासी हो चली है।

कार्टून कोना

Go to top

Powered by Aakar Associates