नई दिल्ली | 9 जनवरी 2026
अमेरिका और भारत के रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फ़ीसदी तक टैरिफ़ लगाने से जुड़े अमेरिकी बिल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। अगर यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो भारत को या तो भारी टैरिफ़ का सामना करना पड़ेगा या फिर रूस से तेल आयात बंद करने जैसा बड़ा फैसला लेना होगा।
यह बिल अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किया गया है, जिसे ‘रशियन सैंक्शंस बिल’ या ‘लिंडसे ग्राहम बिल’ भी कहा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बिल को हरी झंडी दे चुके हैं, जिससे इसके पारित होने की चर्चाएं और तेज़ हो गई हैं।
क्यों भारत बन रहा है निशाना?

भारत रूस से किफायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब भारत और चीन जैसे देशों ने रूसी तेल आयात बढ़ाया। अमेरिका का मानना है कि इससे रूस की “वॉर मशीन” को आर्थिक मदद मिल रही है।
हालांकि हाल के महीनों में भारत के रूसी तेल आयात में गिरावट दर्ज की गई है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, जून 2025 के उच्चतम स्तर से दिसंबर तक भारत का रूसी तेल आयात करीब 40% घट चुका है।
500% टैरिफ़ लगा तो क्या होगा?
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के फाउंडर अजय श्रीवास्तव के मुताबिक, अगर 500% टैरिफ़ लगाया गया तो भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग ठप हो जाएगा।
भारत हर साल अमेरिका को करीब 87.4 अरब डॉलर का निर्यात करता है, जो उसके कुल निर्यात का लगभग पाँचवां हिस्सा है।
उनका कहना है,
“500% टैरिफ़ व्यापार नहीं, बल्कि प्रतिबंध जैसा होगा। अमेरिका में कोई भी भारतीय सामान खरीदने की स्थिति में नहीं रहेगा।”
ट्रंप बोले – मेरी नैतिकता ही मेरी सीमा
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बयान भी खासा चर्चा में है। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी वैश्विक शक्तियों की कोई सीमा है, तो उन्होंने कहा:
“हाँ, एक ही चीज़ मुझे रोक सकती है – मेरी नैतिकता, मेरी सोच।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून की ज़रूरत नहीं है और उसका पालन करना या न करना उनका अपना फैसला होगा।
अमेरिका का दोहरा रवैया?

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका खुद भी रूस से संवर्धित यूरेनियम खरीदता है और यूरोप को संभावित छूट दी जा सकती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बिल का असली निशाना भारत है, जबकि चीन को अपेक्षाकृत सुरक्षित रखा जा रहा है।
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक रूस से तेल को लेकर दंडात्मक कार्रवाई मुख्य रूप से भारत पर ही लागू की गई है, जबकि चीन पर सीधी चोट से बचा गया है।
भारत के सामने आगे की राह
विदेश नीति विशेषज्ञ इंद्राणी बागची का मानना है कि भारत व्यावहारिक नीति अपनाते हुए धीरे-धीरे रूस से तेल आयात शून्य तक ला सकता है, क्योंकि 500% टैरिफ़ लंबे समय तक झेलना संभव नहीं होगा।
वहीं कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि अगर अमेरिका इसी तरह आक्रामक रुख अपनाता रहा, तो भारत-अमेरिका की “रणनीतिक साझेदारी” पर गंभीर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।