AI कंटेंट की बाढ़ के बीच असली क्रिएटर्स की पहचान सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
By Rebecca Ruiz | 1 जनवरी 2026 | टेक इंडस्ट्री
Instagram के CEO एडम मोसेरी (Adam Mosseri) का मानना है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होगी कि AI से बने कंटेंट और असली क्रिएटर के कंटेंट में फर्क कैसे किया जाए।
हाल ही में Threads पर किए गए एक पोस्ट में मोसेरी ने कहा कि Instagram जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूज़र्स का दबाव बढ़ेगा कि उन्हें यह साफ-साफ बताया जाए कि कौन-सा कंटेंट असली है और कौन-सा AI द्वारा जनरेट किया गया है।
मोसेरी के अनुसार, शुरुआती दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म AI कंटेंट को पहचानने और उस पर लेबल लगाने में सफल रहेंगे, लेकिन जैसे-जैसे AI तकनीक और ज्यादा रियल दिखने लगेगी, यह काम बेहद मुश्किल होता चला जाएगा।
उन्होंने लिखा,
“मेरी तरह अब बहुत से लोग यह मानने लगे हैं कि नकली कंटेंट को पहचानने से ज्यादा व्यावहारिक तरीका यह होगा कि असली कंटेंट को ही ‘फिंगरप्रिंट’ किया जाए।”
कैमरा से ही बनेगा ‘डिजिटल फिंगरप्रिंट’
एडम मोसेरी ने सुझाव दिया कि भविष्य में यह ‘फिंगरप्रिंट’ कैमरे के अंदर से ही बनाया जा सकता है।
अगर कैमरा बनाने वाली कंपनियां फोटो या वीडियो कैप्चर करते समय उन्हें क्रिप्टोग्राफिक सिग्नेचर के साथ सेव करें, तो कंटेंट की एक तरह की डिजिटल चेन ऑफ कस्टडी बन सकती है।
इस तकनीक की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई फोटो या वीडियो:
- असली कैमरे से लिया गया है या नहीं
- बाद में उसमें AI की मदद से छेड़छाड़ तो नहीं की गई
क्यों अहम है यह कदम?
AI-जनरेटेड फोटो, वीडियो और डीपफेक कंटेंट तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रहे हैं। ऐसे में:
- फर्जी खबरें बढ़ रही हैं
- असली क्रिएटर्स की पहचान धुंधली पड़ रही है
- यूज़र्स का भरोसा प्लेटफॉर्म्स से उठने का खतरा है
इसी वजह से Instagram और अन्य सोशल मीडिया कंपनियां अब “Real Content Label” जैसे समाधान पर गंभीरता से विचार कर रही हैं