नई दिल्ली | 9 जनवरी 2026
गाड़ी, बस, ट्रेन या जहाज़ में सफ़र करते समय कई लोगों को मतली, चक्कर या उलटी की शिकायत होती है। यह समस्या इतनी आम है कि अक्सर लोग इसे सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन मेडिकल भाषा में इसे मोशन सिकनेस (Motion Sickness) कहा जाता है, और इसके पीछे शरीर के संतुलन से जुड़ा एक वैज्ञानिक कारण होता है।
मोशन सिकनेस क्या है?

मोशन सिकनेस वह स्थिति है, जिसमें सफ़र के दौरान
- चक्कर आना
- सिर दर्द
- उलटी या मतली
- बेचैनी
जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, हर तीन में से एक व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी मोशन सिकनेस से प्रभावित होता है। यह समस्या खासकर पहाड़ी रास्तों, ऊबड़-खाबड़ सड़कों या लंबे सफ़र में ज़्यादा बढ़ जाती है।
सफ़र के दौरान उलटी क्यों होती है?

दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मोहसिन वली बताते हैं कि सफ़र के समय हमारे दिमाग़ को अलग-अलग अंगों से विरोधाभासी संकेत मिलते हैं।
- आंखें कहती हैं कि शरीर स्थिर है (खासकर जब आप किताब या मोबाइल देख रहे हों)
- जबकि कान के अंदर मौजूद बैलेंस सिस्टम (वेस्टिबुलर सिस्टम) दिमाग़ को बताता है कि शरीर हिल रहा है
इन विरोधी संकेतों से दिमाग़ भ्रमित हो जाता है और शरीर इसे किसी ज़हरीले तत्व की मौजूदगी समझ लेता है। ऐसे में शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया होती है — उलटी करना, ताकि वह कथित ज़हर को बाहर निकाल सके।
दिमाग़ और संतुलन का क्या संबंध है?
एम्स की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मंजरी त्रिपाठी बताती हैं कि हमारे शरीर का संतुलन
- आंखों
- कान के बैलेंस ऑर्गन
- और शरीर के मूवमेंट को महसूस करने वाले रिसेप्टर्स
के तालमेल से बना रहता है।
जब सफ़र के दौरान यह तालमेल बिगड़ जाता है, तो ब्रेन स्टेम और हाइपोथैलेमस जैसे हिस्से उत्तेजित हो जाते हैं। इसी वजह से चक्कर, मतली और उलटी की समस्या पैदा होती है।
पेट की स्थिति भी है बड़ी वजह
डॉक्टरों के अनुसार सफ़र के समय ख़ाली पेट या बहुत भारी पेट दोनों ही परेशानी बढ़ा सकते हैं।
- ख़ाली पेट: वेगस नर्व ज़्यादा सक्रिय हो जाती है, जिससे चक्कर और घबराहट बढ़ती है
- भारी भोजन: पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है और उलटी की संभावना बढ़ जाती है
इसलिए सफ़र से पहले हल्का और संतुलित भोजन करने की सलाह दी जाती है।
कब यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है?
डॉ. मोहसिन वली बताते हैं कि हर बार मोशन सिकनेस साधारण नहीं होती। कुछ मामलों में यह
- दिमाग़ की बीमारी
- दवाओं के साइड इफेक्ट
- या बहुत दुर्लभ मामलों में ब्रेन ट्यूमर
का संकेत भी हो सकती है।
अगर सफ़र के दौरान बार-बार और बहुत ज़्यादा उलटी हो रही है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें और डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करें।
सफ़र में उलटी से बचने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार:
✔ सफ़र से पहले भारी भोजन न करें
✔ बिल्कुल ख़ाली पेट भी न रहें
✔ खिड़की से बाहर दूर की ओर देखें
✔ किताब या मोबाइल देखने से बचें
✔ सिर और शरीर को स्थिर रखें
✔ आगे की सीट पर बैठें या संभव हो तो खुद गाड़ी चलाएं
✔ धूम्रपान और निकोटीन से दूरी रखें
✔ हल्का, सुकून देने वाला संगीत सुनें
✔ ज़रूरत हो तो डॉक्टर की सलाह से दवा लें
क्या महिलाओं में यह समस्या ज़्यादा होती है?
डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं में मोशन सिकनेस पुरुषों की तुलना में ज़्यादा देखी जाती है। इसके पीछे
- लो ब्लड प्रेशर
- हार्मोनल बदलाव
- पोश्चरल हाइपोटेंशन
- और शारीरिक संरचना
जैसे कारण जिम्मेदार होते हैं।
पीरियड्स के दौरान शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन से भी यह समस्या बढ़ सकती है।
सफ़र के दौरान उलटी आना आम समस्या ज़रूर है, लेकिन बार-बार होने पर यह शरीर के संतुलन तंत्र से जुड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। सही खान-पान, बैठने की स्थिति और सावधानियों से इससे काफी हद तक बचा जा सकता ह
