कोलकाता | 9 जनवरी 2026
केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को कोलकाता में राजनीतिक रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी, जब छापेमारी के दौरान खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर I-PAC और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रिश्ते को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
ED का क्या दावा है?
ED का आरोप है कि छापेमारी के दौरान
- पार्टी से जुड़ी हार्ड डिस्क,
- आंतरिक दस्तावेज़,
- और संवेदनशील डिजिटल डेटा
को जब्त करने की कोशिश की गई।
एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में जांच में बाधा पहुंचाई गई। वहीं, ममता बनर्जी ने प्रतीक जैन को टीएमसी का आईटी चीफ बताया है।
I-PAC क्या है और कैसे करती है काम?
I-PAC का पूरा नाम इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी है। यह एक राजनीतिक सलाहकार संस्था है, जो राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए
- चुनावी रणनीति
- प्रचार अभियान
- जनसंपर्क और डेटा एनालिसिस
पर काम करती है।
I-PAC की शुरुआत साल 2013 में Citizens for Accountable Governance (CAG) के रूप में हुई थी। संस्था अपनी वेबसाइट पर दावा करती है कि वह ऐसे नेताओं के साथ काम करती है जिनका जनता से सीधा जुड़ाव और मजबूत रिकॉर्ड रहा हो।
किन-किन चुनावों में निभाई अहम भूमिका
I-PAC ने सबसे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए काम किया था। इसके बाद संस्था ने कई राज्यों में अलग-अलग दलों के लिए रणनीति बनाई।
I-PAC द्वारा तैयार किए गए प्रमुख चुनावी अभियान रहे हैं:
- पंजाब कांग्रेस के लिए ‘कैप्टन दे नौ नुक्ते’
- जेडीयू के लिए ‘नीतीश के 7 निश्चय’
- टीएमसी के लिए ‘दीदी की शपथ’
- आम आदमी पार्टी के लिए ‘केजरीवाल की 10 गारंटियां’
टीएमसी के साथ I-PAC ने 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी काम किया, जिनमें पार्टी का प्रदर्शन मजबूत रहा।
प्रशांत किशोर और I-PAC का रिश्ता
I-PAC का नाम लंबे समय तक प्रशांत किशोर से जुड़ा रहा।
2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तक वे I-PAC का प्रमुख चेहरा थे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और संस्था से अलग हो गए।
I-PAC से जुड़े रहे लोगों का कहना है कि प्रशांत किशोर सलाहकार की भूमिका में थे और उनके जाने से कंपनी की संरचना पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
कौन हैं प्रतीक जैन?
प्रशांत किशोर के जाने के बाद I-PAC की कमान
ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन के हाथों में है।
हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रतीक जैन I-PAC के सबसे अहम रणनीतिकार माने जाते हैं।
- प्रतीक जैन I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर हैं
- अप्रैल 2015 से संस्था से जुड़े हुए हैं
- इससे पहले Deloitte में एनालिस्ट के रूप में काम कर चुके हैं
- IIT बॉम्बे से बीटेक की पढ़ाई की है
माना जाता है कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों के लिए टीएमसी की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं के कंधों पर है।
सुर्खियों से दूर रहने वाले रणनीतिकार
टीएमसी नेताओं के मुताबिक,
प्रतीक जैन मीडिया की चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते हैं।
वे कैमरे से दूरी बनाकर, पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले रणनीतिकार हैं।
एक वरिष्ठ टीएमसी नेता के अनुसार,
2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद जब उन्हें मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवाने को कहा गया, तो वे असहज नजर आए — जो उनके स्वभाव को दर्शाता है।
ED की छापेमारी ने न सिर्फ एक कानूनी विवाद को जन्म दिया है, बल्कि I-PAC, प्रतीक जैन और टीएमसी के बीच गहरे रिश्तों को भी एक बार फिर सार्वजनिक बहस में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति में और गर्माहट ला सकता है।