बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के अवसर पर मां शारदा की वंदना का विशेष महत्व होता है। ज्ञान, संगीत और वाणी की देवी मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु भावपूर्वक ‘हे शारदे मां’ वंदना का पाठ करते हैं। यह वंदना अज्ञान से मुक्ति और विद्या के प्रकाश की कामना का प्रतीक मानी जाती है।

प्रसिद्ध सरस्वती वंदना (हे शारदे मां)
हे शारदे मां, हे शारदे मां,
अज्ञानता से हमें तार दे मां।
तू श्वेतवर्णी कमल पे विराजे,
हाथों में वीणा, मुकुट सिर पे साझे,
हम हैं अकेले, हम हैं अधूरे,
हमको शरण ले, हमें तार दे मां॥
हे शारदे मां, हे शारदे मां,
अज्ञानता से हमें तार दे मां।
ऋषियों ने समझी, मुनियों ने जानी,
वेदों की भाषा, पुराणों की वाणी,
हम भी तो समझें, हम भी तो जानें,
विद्या का हमको अधिकार दे मां॥
हे शारदे मां, हे शारदे मां,
अज्ञानता से हमें तार दे मां।
तू स्वर की देवी, ये संगीत तुझ से,
हर शब्द तेरा है, हर गीत तुझ से,
मन से हमारे मिटा दो अंधेरे,
हमको उजालों का संसार दे मां॥
वंदना का भावार्थ और महत्व
इस सरस्वती वंदना में मां से प्रार्थना की गई है कि वे
- अज्ञान और अंधकार को दूर करें
- विद्या, विवेक और समझ का अधिकार दें
- मन और आत्मा को ज्ञान के प्रकाश से भर दें
मां सरस्वती का श्वेत वस्त्र, कमल आसन और वीणा शुद्धता, चेतना और रचनात्मकता के प्रतीक माने जाते हैं।
कब और क्यों करें सरस्वती वंदना?
- बसंत पंचमी
- सरस्वती पूजा
- पढ़ाई या परीक्षा से पहले
- विद्यारंभ संस्कार
- कला, संगीत या लेखन की शुरुआत में
विशेष रूप से छात्र, शिक्षक, लेखक और कलाकार इस वंदना का नियमित पाठ करते हैं।
‘हे शारदे मां’ सरस्वती वंदना केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि ज्ञान, चेतना और आत्म-विकास की प्रार्थना है। सच्चे मन से की गई यह वंदना जीवन में सकारात्मक बदलाव और बौद्धिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।