वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 29 जनवरी 2026 को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Economic Survey) पेश कर दिया है। यह सर्वे देश की अर्थव्यवस्था का सालाना रिपोर्ट कार्ड माना जाता है, जिसमें विकास दर, महंगाई, रोजगार, निर्यात, निवेश और राजकोषीय स्थिति से जुड़े अहम आंकड़े और विश्लेषण शामिल होते हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण बजट से ठीक पहले पेश किया जाता है और यह आने वाले Union Budget 2026 की दिशा और प्राथमिकताओं का संकेत देता है।

बजट सत्र की शुरुआत, आज रहा अहम दिन
भारतीय संसद का बजट सत्र 2026 मंगलवार यानी 28 जनवरी से शुरू हो चुका है। सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। अपने अभिभाषण में उन्होंने सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और भविष्य की योजनाओं का उल्लेख किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और देश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ब्लू इकोनॉमी, नवाचार और समावेशी विकास पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: एकजुट होकर राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की अपील
संसद सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को संबोधित करते हुए अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हितों और विकास से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर चर्चा करें। पीएम मोदी का फोकस भी विकास, स्थिरता और आत्मनिर्भर भारत पर रहा।
मुख्य आर्थिक सलाहकार के नेतृत्व में तैयार हुआ सर्वे
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। सर्वे सदन में पेश किए जाने के बाद इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जाएगी, जिसमें अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और आगे की चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
1 फरवरी को पेश होगा आम बजट 2026
अब सबकी निगाहें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट 2026 पेश करेंगी। बजट से पहले आए आर्थिक सर्वे से यह साफ हो जाएगा कि सरकार की प्राथमिकताएं किन सेक्टर्स पर रहने वाली हैं।
कृषि, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप्स, MSME और मिडिल क्लास को इस बजट से खास उम्मीदें हैं।
क्यों अहम है Economic Survey?
- देश की आर्थिक स्थिति का विस्तृत विश्लेषण
- सरकार की नीतियों का मूल्यांकन
- आने वाले बजट की दिशा तय करने में मदद
- निवेशकों और उद्योग जगत के लिए संकेत