नई दिल्ली:
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को लेकर बड़े और अहम बदलाव किए हैं। इन नए नियमों के बाद अब बार-बार परीक्षा देने की पुरानी व्यवस्था पर लगभग रोक लग गई है। UPSC का साफ कहना है कि एक बार IAS या IFS जैसी शीर्ष सेवा में चयन होने के बाद उम्मीदवार दोबारा उसी परीक्षा के जरिए बेहतर रैंक पाने की कोशिश नहीं कर सकेंगे।
इस बदलाव का सीधा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ेगा, जो चयन के बाद भी हर साल परीक्षा देकर “अपग्रेड” करने की कोशिश करते थे।

IAS और IFS अधिकारियों पर सबसे सख्त नियम
नए नियमों के मुताबिक,
अगर कोई उम्मीदवार पहले ही IAS या IFS सेवा में चयनित होकर सेवा में शामिल हो चुका है, तो वह UPSC CSE में दोबारा आवेदन नहीं कर पाएगा।
इतना ही नहीं, अगर कोई उम्मीदवार CSE का प्रीलिम्स पास करने के बाद और मेन्स से पहले IAS या IFS में नियुक्त हो जाता है, तो उसे मेन्स परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
IPS को लेकर भी नियम बदले
UPSC ने IPS को लेकर भी स्थिति साफ कर दी है।
अगर कोई उम्मीदवार पहले से IPS अधिकारी है, तो वह दोबारा परीक्षा दे सकता है, लेकिन फिर से IPS सेवा नहीं ले पाएगा। यानी IPS से IPS में “री-एंट्री” का रास्ता बंद कर दिया गया है।
एक बार मिलेगा सुधार का मौका
हालांकि UPSC ने उम्मीदवारों को पूरी तरह से बंद रास्ता नहीं दिखाया है।
जो उम्मीदवार CSE 2026 में IAS, IPS या IFS में चयनित होंगे, उन्हें एक बार (CSE 2027) सुधार के लिए परीक्षा देने का मौका मिलेगा।
लेकिन इसकी भी शर्त है—
- उम्मीदवार ने अभी फाउंडेशन ट्रेनिंग जॉइन न की हो, या
- उसे सरकार से वन-टाइम छूट (One-Time Exemption) मिली हो।
अगर सुधार प्रयास में दोबारा चयन हो जाता है, तो उम्मीदवार को पुरानी या नई सेवा में से एक को चुनना होगा, दूसरी अपने आप रद्द हो जाएगी।
अब कौन नहीं दे पाएगा UPSC CSE?
नए नियमों के बाद अब ये उम्मीदवार परीक्षा से बाहर हो जाएंगे—
✔ जो पहले से IAS या IFS अधिकारी हैं और सेवा में बने हुए हैं
✔ जिन्हें प्रीलिम्स के बाद लेकिन मेन्स से पहले IAS/IFS में नियुक्ति मिल जाती है
✔ जो पहले से IPS हैं और फिर से IPS सेवा पाना चाहते हैं
किन पर असर नहीं पड़ेगा?
जो उम्मीदवार अब तक UPSC से चयनित नहीं हुए हैं, वे पहले की तरह
- अपनी आयु सीमा
- और अटेम्प्ट लिमिट
के भीतर परीक्षा दे सकते हैं।
क्यों किया गया यह बदलाव?
UPSC का मानना है कि इन बदलावों से—
- परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी
- “परमानेंट कैंडिडेट” कल्चर खत्म होगा
- और नई प्रतिभाओं को ज़्यादा मौके मिलेंगे
कुल मिलाकर, UPSC का यह फैसला सिविल सेवा परीक्षा के इतिहास में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अब UPSC CSE सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक बार का निर्णायक मौका बनती जा रही है।