नई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह राज्य कर्मचारियों को उनके बकाया महंगाई भत्ते (DA) का 25 प्रतिशत तुरंत जारी करे। यह फैसला लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य सरकार पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव दोनों बढ़ गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि
राज्य सरकार कर्मचारियों को उनके वैध अधिकार से लंबे समय तक वंचित नहीं रख सकती।
अदालत ने माना कि
✔ केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में
✔ पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों को
काफी समय से कम DA मिल रहा है, जो संवैधानिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
इसी आधार पर कोर्ट ने बकाया DA का कम से कम 25% भुगतान तुरंत करने का आदेश दिया।
कितना DA बकाया है?
मामले में बताया गया कि
- केंद्र सरकार के कर्मचारियों को जहां लगभग 50% से अधिक DA मिल रहा है
- वहीं पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों को अभी भी काफी कम DA दिया जा रहा है
इसी अंतर को लेकर कर्मचारी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
राज्य सरकार को क्यों लगा झटका?
यह मामला लंबे समय से कोर्ट में चल रहा था।
ममता सरकार का तर्क था कि
- राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर है
- एकमुश्त DA देना संभव नहीं है
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और कहा कि
वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देकर कर्मचारियों के अधिकार नहीं छीने जा सकते।
कर्मचारियों में खुशी, सरकार पर बढ़ा दबाव
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद
- सरकारी कर्मचारियों
- पेंशनर्स
- कर्मचारी संगठनों
में खुशी की लहर है।
वहीं दूसरी ओर, ममता बनर्जी सरकार पर अब
- बाकी बचे DA के भुगतान
- और भविष्य में DA समानता लागू करने
का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है।
आगे क्या?
कोर्ट के आदेश के अनुसार
- राज्य सरकार को जल्द से जल्द 25% बकाया DA जारी करना होगा
- अगली सुनवाई में बाकी DA को लेकर स्थिति साफ हो सकती है
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह फैसला
पूरे बकाया DA की लड़ाई में एक बड़ी जीत है।
पश्चिम बंगाल DA मामला अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को
- कर्मचारियों के अधिकारों की जीत
- और राज्य सरकार के लिए कड़ा संदेश
माना जा रहा है।
