कोलकाता: Mamata Banerjee की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस और Bharatiya Janata Party के बीच होने वाला West Bengal Assembly Election 2026 इस बार कई बड़े विवादों और नए समीकरणों के बीच होने जा रहा है। चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है।
सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची से 63 लाख से अधिक नाम हटने और करीब 60 लाख नामों के विचाराधीन होने को लेकर है। इस मुद्दे ने बंगाल की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ‘बंगाली अस्मिता’ को चुनावी मुद्दा बनाकर भाजपा के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोल चुकी हैं, जबकि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भाजपा घुसपैठ, भ्रष्टाचार और जनसांख्यिकी बदलाव जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है।
बंगाली पहचान की राजनीति पर दांव
तृणमूल कांग्रेस इस चुनाव में फिर से ‘बाहरी बनाम भीतरी’ के पुराने नैरेटिव को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
ममता बनर्जी भाजपा पर आरोप लगा रही हैं कि अन्य राज्यों में बांग्ला भाषियों के साथ भेदभाव हो रहा है और बंगाली संस्कृति पर हमला किया जा रहा है। इसी आधार पर वह ‘बंगाली पहचान’ को राजनीतिक ढाल बनाकर मतदाताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव, नागरिकता को लेकर डर
चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है।
करीब 63.66 लाख नाम हटाए गए
मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई
60.06 लाख नाम अभी जांच के दायरे में
इस बदलाव ने खासतौर पर सीमावर्ती जिलों और शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के समीकरण बदल दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतुआ समुदाय और प्रवासी वोटर लगभग 50 से ज्यादा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, इसलिए मतदाता सूची में बदलाव का असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ सकता है।
शहरी असंतोष और ‘Reclaim the Night’ आंदोलन
कोलकाता के R.G. Kar Medical College and Hospital की घटना के बाद शुरू हुआ ‘Reclaim the Night’ आंदोलन शहरी इलाकों में सरकार के खिलाफ बड़ा सामाजिक विरोध बनकर उभरा है।
महिलाओं, युवाओं और नागरिक संगठनों ने सुरक्षा और संस्थागत सुधार की मांग को लेकर आवाज उठाई। हालांकि आंदोलन को विपक्षी दलों से दूरी बनाकर चलाया गया, लेकिन इससे **शहरी मतदाताओं में असंतोष बढ़ा** है, जो चुनाव में सत्ता विरोधी लहर में बदल सकता है।
भ्रष्टाचार, उद्योग और जनसांख्यिकी का मुद्दा
विपक्ष लगातार स्कूल भर्ती घोटाले को लेकर तृणमूल सरकार को घेर रहा है। इस मामले में 25,000 से ज्यादा नियुक्तियों को रद्द किए जाने के बाद यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
दूसरी ओर भाजपा का आरोप है कि राज्य में उद्योगों का पलायन हुआ है और रोजगार के अवसर कम हुए हैं।
हाल ही में मालदा में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अवैध घुसपैठ और बदलती जनसांख्यिकी का मुद्दा उठाकर संकेत दिया कि भाजपा इस चुनाव में सुरक्षा और ध्रुवीकरण को प्रमुख रणनीति बनाएगी।
# क्या ममता बनर्जी बचा पाएंगी किला?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि **West Bengal Assembly Election 2026** कई कारणों से बेहद दिलचस्प होने वाला है।
बंगाली अस्मिता बनाम राष्ट्रीय राजनीति
वोटर लिस्ट विवाद
शहरी असंतोष
भ्रष्टाचार और रोजगार का सवाल
इन सभी मुद्दों के बीच यह चुनाव तय करेगा कि Mamata Banerjee तीसरी बार अपना किला बचा पाती हैं या Bharatiya Janata Party बंगाल की सत्ता में सेंध लगाने में कामयाब होती है।