
देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोगों से फिलहाल सोना खरीदने से बचने और गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील की है। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार यानी Forex Reserves को सुरक्षित रखना बताया जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे होते कच्चे तेल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है।
दरअसल भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। इसमें कच्चा तेल और सोना सबसे बड़े आयात में शामिल हैं। जब भारत ज्यादा सोना खरीदता है, तो भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और रुपये पर असर पड़ सकता है।
सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में फिजूल आयात कम करना जरूरी है। इसी वजह से पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि वे कुछ समय तक सोने की खरीद टालें और ईंधन की बचत करें।
रूस का उदाहरण भी इसी संदर्भ में दिया जा रहा है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद Russia को डॉलर आधारित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सिस्टम में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इससे कई देशों ने डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और डॉलर की मांग भी तेज होगी। ऐसे में सरकार पहले से सतर्कता बरतना चाहती है।
हालांकि भारत के पास अभी मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, लेकिन सरकार भविष्य के जोखिम को देखते हुए सावधानी अपनाने के मूड में है। पीएम मोदी का संदेश भी इसी आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।