
पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के हालिया चुनावों में राजनीतिक दलों ने जनता से कई बड़े वादे किए हैं। लेकिन अब इन घोषणाओं को पूरा करना राज्य सरकारों के लिए भारी आर्थिक चुनौती बन सकता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मुफ्त योजनाओं और कैश ट्रांसफर के कारण राज्यों के खजाने पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
पश्चिम बंगाल पर सबसे ज्यादा दबाव
West Bengal में भाजपा ने महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को हर महीने 3,000 रुपये देने का वादा किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन योजनाओं को लागू करने में राज्य के खजाने पर करीब 72,600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
इसके अलावा किसानों को आर्थिक सहायता, बेरोजगारी भत्ता और धान के MSP में बढ़ोतरी जैसे वादों से भी राज्य का वित्तीय गणित बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
तमिलनाडु में सोना-साड़ी से मुफ्त बिजली तक वादे
Tamil Nadu में चुनावी घोषणाओं ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है। यहां महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, साल में 6 मुफ्त LPG सिलेंडर और बेरोजगार युवाओं को 4,000 रुपये मासिक सहायता देने का वादा किया गया है।
इसके अलावा गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए 8 ग्राम सोना और रेशमी साड़ी देने की घोषणा भी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन योजनाओं से राज्य के बजट पर करीब 87,900 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आ सकता है।
केरल में भी बढ़ेगा खर्च
Kerala में पेंशन योजनाओं का खर्च बढ़ने से करीब 8,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है। इससे राज्य का राजकोषीय घाटा और बढ़ सकता है।
अर्थशास्त्रियों ने जताई चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव जीतने के लिए मुफ्त योजनाएं और लोकलुभावन घोषणाएं अब राजनीति का बड़ा हथियार बन चुकी हैं। लेकिन इन वादों को पूरा करने के लिए राज्यों को भारी कर्ज लेना पड़ सकता है।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कई राज्यों का वित्तीय घाटा पहले ही तय सीमा के करीब है। ऐसे में बड़े पैमाने पर कैश ट्रांसफर और मुफ्त योजनाएं आने वाले वर्षों में आर्थिक संकट खड़ा कर सकती हैं।
क्या होगा असर?
राज्यों का कर्ज तेजी से बढ़ सकता है
विकास परियोजनाओं पर खर्च घट सकता है
टैक्स और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है
राजकोषीय घाटा नियंत्रण से बाहर जा सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि मुफ्त योजनाओं और आर्थिक अनुशासन के बीच संतुलन बनाना अब राज्य सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।