
Vat Savitri Vrat हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत रखती हैं। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
कब है वट सावित्री व्रत 2026?
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और उसके चारों ओर धागा बांधकर परिक्रमा करती हैं।
क्यों खास है वट वृक्ष?
धार्मिक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में Brahma, Vishnu और Shiva का वास माना जाता है। इसलिए इसकी पूजा को बेहद शुभ माना जाता है।
सावित्री-सत्यवान की कथा
इस व्रत का संबंध देवी सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और अटूट प्रेम से Yama से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
व्रत का संकल्प लें
वट वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं
रोली, अक्षत, फूल और जल अर्पित करें
पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा लपेटते हुए परिक्रमा करें
सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें
पति की लंबी उम्र की कामना करें
महिलाओं में दिखता है खास उत्साह
वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं पारंपरिक सोलह श्रृंगार करती हैं और नई साड़ी पहनकर पूजा में शामिल होती हैं। कई जगहों पर सामूहिक पूजा और कथा आयोजन भी किए जाते हैं।