झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, और सवाल उठ रहा है कि क्या चाचा‑भतीजा, चंपई सोरेन और हेमंत सोरेन, फिर साथ आ सकते हैं। चंपई सोरेन, जिन्होंने अगस्त 2024 में JMM छोड़कर BJP का दामन थामा था, उन्होंने पार्टी में अपमान और कुर्सी खोने का दर्द जताया था। इसके बाद मीडिया और सोशल मीडिया में अफवाहें उड़ीं कि चंपई वापस JMM में लौट सकते हैं और अपने भतीजे हेमंत के साथ फिर गठबंधन कर सकते हैं, लेकिन यह साबित हुआ कि पुराने वीडियो और बयान गलत संदर्भ में पेश किए गए थे। फिलहाल चंपई ने स्पष्ट कर दिया है कि वह BJP में ही हैं और वहीं रहेंगे। दूसरी ओर, हेमंत सोरेन, जो वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हैं, और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन दिल्ली में BJP के कुछ बड़े नेताओं से चर्चा में दिखाई दिए। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं कि झारखंड में सत्ता समीकरण बदल सकता है। सूत्रों के अनुसार, संभावित समझौते में चंपई सोरेन या बाबूलाल मरांडी को डिप्टी CM के साथ विधानसभा अध्यक्ष जैसे बड़े पद दिए जा सकते हैं, जबकि केंद्र में कोयला मंत्रालय को लेकर भी चर्चा चल रही है। राज्य सरकार के महंगे वादों और वित्तीय दबाव ने भी BJP के साथ राजनीतिक सहयोग की अटकलों को हवा दी है। महिलाओं को ₹2,500 मासिक भत्ता और धान का ₹3,200 MSP जैसे वादे सरकार पर भारी पड़ रहे हैं, और इस वजह से राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए नई रणनीति की चर्चा हो रही है। हालांकि, Hemant Soren और बाबूलाल मरांडी जैसे पुराने विरोधियों के बीच आई चुप्पी भी संकेत देती है कि झारखंड में कुछ बड़ा समीकरण बदलने वाला है। फिलहाल, न तो किसी पार्टी ने इस गठबंधन की पुष्टि की है और न ही कोई आधिकारिक बयान आया है। मीडिया रिपोर्ट्स और अफवाहों के बावजूद, यह कहना जल्दबाजी होगी कि चाचा‑भतीजा फिर साथ आ रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल यह केवल कयास और मीडिया हाइप है, और वास्तविक राजनीतिक बदलाव अगले कुछ महीनों में ही स्पष्ट हो पाएगा। झारखंड की राजनीति में महागठबंधन, BJP और JMM के बीच समीकरण अभी भी अस्थिर हैं, और आगामी महीनों में नए गठबंधन, सत्ता समीकरण और राजनीतिक रणनीति तय करेंगे कि कौन किसके साथ होगा और सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।