नई दिल्ली/वॉशिंगटन:
अमेरिका और रूस के बीच जारी तनाव अब एक नए और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बीच अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह तेल टैंकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से तेल की ढुलाई कर रहा था। इसी आधार पर अमेरिकी एजेंसियों ने समुद्र में ही जहाज को रोककर अपने नियंत्रण में ले लिया। बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन को अंजाम देने से पहले कई दिनों तक टैंकर का पीछा किया गया।
इस घटना पर रूस ने कड़ी आपत्ति जताई है। मॉस्को ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई को समुद्री डकैती करार दिया है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका का यह कदम गैरकानूनी है और इससे वैश्विक स्तर पर सैन्य व राजनीतिक तनाव और बढ़ेगा।
रूस की संसद के कुछ सदस्यों ने चेतावनी दी है कि अगर इस तरह की कार्रवाइयां जारी रहीं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल दोनों देशों की ओर से सीधे सैन्य टकराव की कोई घोषणा नहीं की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत नहीं है, लेकिन अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों के बीच टकराव की स्थिति को और गंभीर जरूर बनाती है। अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्र में इस तरह की कार्रवाई यह संकेत देती है कि वह अपने प्रतिबंधों को वैश्विक स्तर पर सख्ती से लागू करने के मूड में है।
दूसरी ओर रूस इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
इस घटनाक्रम का असर सिर्फ अमेरिका और रूस तक सीमित नहीं रहेगा। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। कई देश इस स्थिति को चिंता की नजर से देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, रूसी तेल टैंकर की जब्ती ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक राजनीति एक बार फिर अस्थिर दौर से गुजर रही है। भले ही फिलहाल युद्ध की स्थिति न हो, लेकिन बढ़ता तनाव दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी जरूर है।