
गाजियाबाद। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब देश के शहरों में भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति रुकने से सड़क किनारे ठेलियों और छोटे दुकानदारों को अपने खाने के मेन्यू में बदलाव करना पड़ रहा है।
जहां पहले ठेलियों पर छोले-भटूरे की खुशबू आती थी, वहां अब दाल-नान, दाल-चावल और तंदूरी रोटी जैसे व्यंजन परोसे जा रहे हैं।
सिलेंडर नहीं मिलने से बदला मेन्यू
राजनगर में पिछले 18 साल से ठेले पर छोले-भटूरे बेचने वाले चंदू, जो मूल रूप से बस्ती के रहने वाले हैं, उनकी दुकान पर रोज की तरह शुक्रवार को भी ग्राहक पहुंचे। लेकिन इस बार उन्हें पता चला कि मेन्यू बदल चुका है।
चंदू ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने की वजह से भटूरे बनाना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उन्होंने दाल-चावल, सब्जी और नान जैसे विकल्प शुरू कर दिए हैं।
घर से बनाकर ला रहे दाल-सब्जी
दुकानदार अब घर से दाल, चावल और सब्जी बनाकर ला रहे हैं। दुकान पर लगे तंदूर में तंदूरी रोटी और नान तैयार कर ग्राहकों को परोसा जा रहा है। वहीं दाल और सब्जी को तंदूर की मदद से गर्म किया जा रहा है।
दुकानदारों का कहना है कि एलपीजी संकट के बीच कमाई जारी रखने और ग्राहकों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें यह तरीका अपनाना पड़ रहा है।
2000 से ज्यादा दुकानदारों ने बदला मेन्यू
चंदू अकेले ऐसे दुकानदार नहीं हैं जिन्होंने यह बदलाव किया है। शहर में करीब 2000 से अधिक छोले-भटूरे बेचने वाले विक्रेता हैं और कमर्शियल सिलेंडर न मिलने के कारण ज्यादातर ने अपने मेन्यू में बदलाव कर दिया है।
दुकानदारों का कहना है कि अगर जल्द ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो उनका कारोबार और ज्यादा प्रभावित हो सकता है। इसलिए उन्होंने सरकार से जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।