पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक नया विवाद सामने आया है। ओडिशा पुलिस ने 17 बांग्लाभाषी मजदूरों को बांग्लादेशी होने के संदेह में हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि ये सभी मजदूर वोट देने के लिए बंगाल लौट रहे थे।

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, ये मजदूर ओडिशा के बेलागुटा इलाके में कपड़े और अन्य सामान के छोटे कारोबार से जुड़े थे। चुनाव के मद्देनजर वे अपने घर पश्चिम बंगाल लौट रहे थे, तभी पुलिस ने रास्ते में उनसे पूछताछ की और दस्तावेज मांगने के बाद हिरासत में ले लिया।
बताया जा रहा है कि सभी मजदूर मालदा जिले के हरिश्चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं।
परिवारों का आरोप: “भाषा के आधार पर कार्रवाई”
गिरफ्तार मजदूरों के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ बांग्ला भाषा बोलने की वजह से उन्हें संदेह के दायरे में लाया गया। परिवारों ने इसे “जान-बूझकर परेशान करने” की कार्रवाई बताया है।
तृणमूल का हमला
इस मुद्दे पर All India Trinamool Congress ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए Bharatiya Janata Party पर निशाना साधा है।
टीएमसी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर मजदूरों को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
भाजपा का पक्ष
वहीं भाजपा का कहना है कि पुलिस ने बिना कारण कोई कार्रवाई नहीं की होगी। पार्टी का तर्क है कि जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी और अगर मजदूर भारतीय नागरिक हैं, तो उन्हें रिहा कर दिया जाएगा।
बढ़ा राजनीतिक तनाव
इस घटना के बाद मालदा और आसपास के इलाकों में सियासी माहौल गर्म हो गया है। चुनाव के समय इस तरह की घटनाएं राजनीतिक दलों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकती हैं।
रिहाई की मांग तेज
स्थानीय लोगों और परिजनों ने सभी मजदूरों की जल्द रिहाई की मांग की है। उनका कहना है कि ये लोग मेहनत-मजदूरी करने वाले आम नागरिक हैं और उन्हें बिना ठोस सबूत के हिरासत में रखना गलत है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और आगे प्रशासन क्या कदम उठाता है।