पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सत्ताधारी All India Trinamool Congress (टीएमसी) ने भाजपा पर मतदाताओं को लुभाने और निजी जानकारी जुटाने का आरोप लगाया है। मामला सोनारपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां फॉर्म बांटे जाने को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।
क्या है पूरा मामला?

टीएमसी का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से भाजपा कार्यकर्ता ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना के नाम पर इलाके में फॉर्म बांट रहे हैं। माइक के जरिए प्रचार करते हुए लोगों, खासकर महिलाओं, को इस योजना से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
सोनारपुर दक्षिण से टीएमसी उम्मीदवार लवली मैत्रा ने दावा किया कि फॉर्म भरवाने के नाम पर महिलाओं से आधार कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी ली जा रही है। उनका कहना है कि यह चुनाव से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है।
‘पैसे का लालच’ देने का आरोप
टीएमसी नेताओं का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता यह कह रहे हैं कि फॉर्म भरने पर सीधे बैंक खाते में पैसे आएंगे। इसे लेकर पार्टी ने इसे ‘वोट खरीदने की कोशिश’ बताया है और इसे गैरकानूनी करार दिया है।
भाजपा ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं Bharatiya Janata Party (भाजपा) ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि यह उनके घोषणापत्र से जुड़ा प्रचार अभियान है।
दक्षिण 24 परगना जिला अध्यक्ष मनोरंजन जोराद्दार के अनुसार, महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव पार्टी के संकल्प पत्र में शामिल है और उसी का प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीधे पैसे देने का कोई वादा नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग में शिकायत
मामले को गंभीर मानते हुए टीएमसी ने Election Commission of India से शिकायत की है। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
चुनाव आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
इलाके में बढ़ी हलचल
इस विवाद के बाद सोनारपुर इलाके में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मतदाताओं के बीच भी भ्रम की स्थिति बन गई है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में पुलिस गश्त बढ़ा दी है।
चुनावी माहौल में नया मुद्दा
बंगाल चुनाव से पहले यह मुद्दा अब बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। एक तरफ टीएमसी इसे चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे अपने प्रचार का हिस्सा बता रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Election Commission of India इस मामले में क्या कदम उठाता है और इसका चुनावी माहौल पर कितना असर पड़ता है।