
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद दिल्ली सरकार फायर सेफ्टी नियमों को और सख्त बनाने जा रही है। इस हादसे के बाद राजधानी में व्यापक फायर सेफ्टी अभियान शुरू किया गया है और भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
सरकार के प्रस्तावित नए नियमों के तहत घरों और इमारतों में स्मोक डिटेक्टर लगाना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके साथ ही आग लगने की स्थिति में तुरंत नियंत्रण के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम भी जरूरी बनाने की सिफारिश की गई है।
नए प्रावधानों में नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट पर भी जोर दिया गया है। भवन मालिक और निवासी दिल्ली फायर सर्विस की सूची में शामिल प्रमाणित ऑडिटरों से सुरक्षा जांच करा सकेंगे। ऑडिट रिपोर्ट ऑनलाइन जमा की जाएगी ताकि निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फायर सेफ्टी उपकरण केवल लगाने भर से काम नहीं चलेगा। स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम का नियमित रखरखाव और जांच भी अनिवार्य होगी।
मालवीय नगर हादसे के बाद उपराज्यपाल ने पूरे शहर में एक महीने का विशेष फायर सेफ्टी निरीक्षण अभियान चलाने का आदेश दिया है। इस अभियान के तहत होटल, नर्सिंग होम, कोचिंग संस्थान, रेस्टोरेंट और अन्य संवेदनशील व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी।
3 जून 2026 को मालवीय नगर स्थित एक होटल परिसर में लगी आग में 21 लोगों की जान चली गई थी। हादसे के बाद सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठे, जिसके चलते सरकार ने फायर सेफ्टी व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया है।
सरकार का कहना है कि इन नए नियमों का उद्देश्य आग लगने की घटनाओं में जान-माल के नुकसान को कम करना और लोगों को समय रहते चेतावनी एवं सुरक्षा उपलब्ध कराना है।