ईद-उल-फितर 2026 की तारीख भारत में तय हो गई है। देश के कई हिस्सों में 19 मार्च 2026 को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया, जिसके बाद घोषणा की गई कि भारत में ईद-उल-फितर शनिवार, 21 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। वहीं, केरल में चांद दिखने की खबर के बाद वहां ईद शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को मनाई जा रही है।

ईद-उल-फितर रमजान के पाक महीने के खत्म होने की खुशी में मनाया जाने वाला बड़ा इस्लामी त्योहार है। एक महीने के रोजों, इबादत, सब्र और दुआ के बाद यह दिन खुशियों, शुक्रगुजारी और भाईचारे का संदेश लेकर आता है। इस दिन लोग अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं और अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ खुशियां बांटते हैं।
ईद की सुबह लोग जल्दी उठकर नहाते-धोते हैं, नए या साफ कपड़े पहनते हैं और नमाज से पहले सदका-ए-फित्र या जकात-उल-फितर अदा करते हैं। इसके बाद मस्जिदों और ईदगाहों में खास नमाज पढ़ी जाती है। नमाज के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं।
इस त्योहार की सबसे खास बात यह है कि यह केवल जश्न का दिन नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद का भी दिन माना जाता है। जकात-उल-फितर का मकसद यही होता है कि गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशी में शामिल हो सकें। यही वजह है कि ईद को मोहब्बत, बराबरी और इंसानियत का त्योहार भी कहा जाता है।
ईद-उल-फितर पर घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। सेवइयां, शीर खुरमा और कई पारंपरिक व्यंजन इस दिन की रौनक बढ़ा देते हैं। बच्चे ईदी पाते हैं, घरों में मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है और पूरा माहौल खुशियों से भर जाता है।
ईद का त्योहार यह संदेश देता है कि जिंदगी में प्रेम, करुणा, दान और आपसी सम्मान सबसे बड़ी ताकत हैं। रमजान के महीने में सीखी गई सादगी, संयम और इंसानियत की सीख को ईद के दिन और आगे के जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी जाती है।