
रांची: राज्य में हुए ट्रेजरी घोटाले के बाद राज्य सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों का वेतन अब तकनीकी कारणों से अटकने की संभावना कम हो जाएगी।
पहले घोटाला सामने आने के बाद वित्त विभाग ने कई तरह की सत्यापन व्यवस्था लागू की थी, लेकिन इससे कर्मचारियों के वेतन भुगतान में काफी देरी होने लगी थी। अब विभाग ने इस समस्या को दूर करने के लिए नई एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार की है। इसके तहत कर्मचारी डेटा में बदलाव और वेतन भुगतान की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और ऑनलाइन बनाया गया है।
प्रोफाइल फ्रीज होने से बढ़ रही थी दिक्कत
वर्तमान आईएफएमएस प्रणाली के तहत मार्च-अप्रैल से वेतन निकासी के बाद डीडीओ स्तर पर कर्मचारियों की प्रोफाइल फ्रीज की जा रही थी। इससे कर्मचारियों के प्रमोशन, ट्रांसफर, पदनाम परिवर्तन, वेतन संशोधन और बैंक अकाउंट डिटेल्स जैसे जरूरी अपडेट समय पर नहीं हो पा रहे थे। इसके कारण अगले महीने का वेतन अटकने की आशंका बनी रहती थी।
नई व्यवस्था इसी परेशानी को दूर करने के लिए लागू की गई है।
कर्मचारी डेटा को दो हिस्सों में बांटा गया
वित्त विभाग ने कर्मचारियों के मास्टर डेटा को दो भागों में विभाजित किया है।
बेसिक प्रोफाइल
इसमें कर्मचारी की स्थायी जानकारी शामिल रहेगी, जैसे:
जीपीएफ नंबर
नाम
जन्म तिथि
आधार नंबर
पैन नंबर
मोबाइल नंबर
जेंडर
नॉमिनी संबंधी जानकारी
सैलरी और पोस्टिंग प्रोफाइल
इसमें कर्मचारी की सेवा और वेतन से जुड़ी जानकारियां रहेंगी, जैसे:
पदनाम
पोस्टिंग स्थान
बेसिक पे
पे बैंड
पे लेवल
बैंक अकाउंट नंबर
आईएफएससी कोड
अब ऑनलाइन होगा संशोधन
यदि किसी कर्मचारी की प्रोफाइल फ्रीज है और उसमें सुधार की जरूरत है, तो कर्मचारी को ईम्प्लोयी पोर्टल के जरिए ऑनलाइन रिक्वेस्ट भेजनी होगी। डीडीओ उस अनुरोध को अप्रूव कर पेंशन एवं लेखा निदेशालय को फॉरवर्ड करेंगे। अंतिम संशोधन निदेशालय स्तर से किया जाएगा।
मोबाइल पर मिलेगा अलर्ट
नई व्यवस्था के तहत प्रोफाइल में किसी भी तरह का बदलाव होते ही संबंधित कर्मचारी के मोबाइल नंबर पर एसएमएस भेजा जाएगा। इससे डेटा में किसी भी प्रकार की अनधिकृत छेड़छाड़ पर नजर रखी जा सकेगी।
घोटाले के बाद सख्ती
प्रधान महालेखाकार की रिपोर्ट में गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद वित्त विभाग ने यह नई व्यवस्था लागू की है। विभाग का कहना है कि इससे कर्मचारियों का डेटा अधिक सुरक्षित रहेगा और अवैध तरीके से वेतन निकासी की संभावना कम होगी।