
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 के दौरान ट्रंप ने बड़ा यू-टर्न लेते हुए यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी वापस ले ली है। साथ ही उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर अपने इरादों को भी खुलकर सामने रखा।
यूरोप को राहत, टैरिफ नहीं लगाएगा अमेरिका
21 जनवरी को दावोस में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका अपने यूरोपीय सहयोगियों पर कोई नया टैरिफ नहीं लगाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रीनलैंड को लेकर नाटो (NATO) के साथ बातचीत हो चुकी है और भविष्य में आर्कटिक क्षेत्र को लेकर एक साझा फ्रेमवर्क तैयार किया जा सकता है।
ट्रंप के इस बयान को यूरोप के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले उन्होंने व्यापारिक प्रतिबंधों के संकेत दिए थे।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप का बड़ा दावा
टैरिफ पर नरमी दिखाने से कुछ ही समय पहले ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर बेहद सख्त बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड को “हासिल करना चाहता है”, जिसमें उस पर अधिकार, टाइटल और मालिकाना हक शामिल है।
हालांकि ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि इसके लिए वह ताकत या सैन्य बल का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
“हम ग्रीनलैंड चाहते हैं, लेकिन मैं बल प्रयोग नहीं करना चाहता। मुझे इसकी जरूरत नहीं है,”
— डोनाल्ड ट्रंप
NATO और यूरोपीय देशों पर कसा तंज
अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों और NATO पर तंज कसते हुए कहा कि
अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यूरोप को बचाया था, और आज उनकी मांग उसके मुकाबले “बहुत छोटी” है।
उन्होंने यह भी कहा कि NATO को अमेरिकी विस्तारवाद को रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
दावोस से पहले दबाव की राजनीति?
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अक्सर बातचीत से पहले दबाव बनाने की रणनीति अपनाते हैं, खासकर जब उन्हें लगता है कि इससे कोई फायदेमंद डील हो सकती है। दावोस सम्मेलन से पहले उनके तीखे बयान इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इन बयानों के चलते NATO जैसे मजबूत सैन्य गठबंधन में भी दरार की आशंका पैदा हो गई थी, जो शीत युद्ध के दौर से अब तक एकजुट रहा है।
ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं: NATO सदस्य
इस बीच NATO के कुछ सदस्य देशों ने साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है और इसे डेनमार्क से छीना नहीं जा सकता। ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है।