रांची: हटिया रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को आरपीएफ रांची मंडल ने ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत दो नाबालिगों को बचाया, जो अपने घर से भागकर बेंगलुरु जाने की योजना बना रहे थे। ये दोनों बालक चतरा जिले के जोलडीहा गांव के निवासी थे और अपने पिता द्वारा डांटे जाने के बाद घर छोड़कर स्टेशन पहुंचे थे।

आरपीएफ और डीएनएफटी टीम की संयुक्त कार्रवाई के तहत प्लेटफार्म नंबर एक पर शाम करीब पांच बजे संदिग्ध अवस्था में घूमते हुए दोनों बालकों को देखा गया। पूछताछ के दौरान दोनों ने बताया कि वे घर से भागकर मजदूरी के लिए बेंगलुरु जा रहे थे, लेकिन वे अपने परिजनों का मोबाइल नंबर भी नहीं बता पाए।
इस सूचना के बाद आरपीएफ ने तत्काल चाइल्ड लाइन रांची को सूचित किया, और दोनों नाबालिगों को चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया गया। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, उन्हें कानूनी कार्रवाई और परामर्श के लिए सुरक्षित स्थान पर भेजा गया।
आरपीएफ रांची मंडल के कमांडेंट पवन कुमार के नेतृत्व में यह अभियान चला, जिसमें एएसआई एसके सिंह, मुकेश नायक और डीएनएफटी टीम की लेडी स्टाफ एसपी खलखो की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह कार्रवाई न केवल बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से अहम है, बल्कि यह भी दिखाती है कि रेलवे पुलिस और चाइल्ड लाइन जैसी संस्थाएं बच्चों के संरक्षण में कितनी सक्रिय हैं।
संबंधित अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए परिवारों से अपील की कि वे बच्चों के साथ अधिक संवाद करें और उनकी मानसिक स्थिति को समझने की कोशिश करें ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
सुरक्षा और सावधानी से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें:
बच्चों को कभी भी अकेला यात्रा करने की अनुमति न दें।
अपने बच्चों से अच्छे से संवाद करें और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
अगर बच्चों के व्यवहार में बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत उनसे बातचीत करें और उनके साथ समय बिताएं।