13 साल तक कोमा में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने वाले हरीश राणा का बुधवार को दक्षिण दिल्ली स्थित AIIMS में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही एक लंबी कानूनी और भावनात्मक लड़ाई का अंत हो गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
13 साल तक कोमा में रहे

हरीश राणा साल 2013 में एक गंभीर हादसे के बाद कोमा में चले गए थे। इसके बाद से ही वह वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम के सहारे जीवित थे। परिवार ने वर्षों तक उनका इलाज कराया, लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट से मिली इच्छामृत्यु की अनुमति
मार्च 2026 में Supreme Court of India ने हरीश राणा के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए passive euthanasia (इच्छामृत्यु) की अनुमति दी थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद डॉक्टरों की निगरानी में उनका लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाया गया।
पिता का आखिरी संदेश हुआ वायरल
हरीश राणा के निधन के तुरंत बाद उनके पिता का एक भावुक संदेश सामने आया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। उन्होंने अपने बेटे के लिए कहा:
बेटा, अब तुम मुक्त हो। हमने हर संभव कोशिश की। अब शांति से जाओ।
यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों की आंखें नम हो गईं।
परिवार ने दी भावुक विदाई
अस्पताल में अंतिम समय के दौरान पूरा परिवार उनके साथ मौजूद था। परिजनों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। बताया जा रहा है कि अंतिम क्षणों में परिवार ने उन्हें सबको माफ कर दो कहते हुए अलविदा कहा।
देशभर में छिड़ी बहस
हरीश राणा का मामला केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि right to die with dignity यानी सम्मान के साथ मृत्यु के अधिकार पर देशभर में नई बहस छेड़ गया है। Supreme Court के इस फैसले को कई लोग मानवीय और संवेदनशील कदम मान रहे हैं।