
Sujit Bose को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले मामले में गिरफ्तार कर लिया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद यह पहली बड़ी राजनीतिक गिरफ्तारी मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि ED ने 11 मई को सुजीत बोस से करीब साढ़े 10 घंटे तक पूछताछ की थी। जांच एजेंसी का दावा है कि पूछताछ के दौरान बोस लगातार बयान बदल रहे थे और जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या है नगरपालिका भर्ती घोटाला?
ED के मुताबिक मामला ‘साउथ दम दम’ नगरपालिका में कथित अवैध भर्ती से जुड़ा है। आरोप है कि कई पदों पर भर्ती के लिए करीब 150 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई थी। उस समय सुजीत बोस नगरपालिका के उपाध्यक्ष थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि इन नियुक्तियों के बदले आर्थिक लाभ लिया गया और कथित तौर पर कई लग्जरी फ्लैट्स भी हासिल किए गए। ED को बोस से जुड़े बैंक खातों में भारी नकद जमा होने के सबूत मिलने का भी दावा किया गया है।
पहले भी हुई थी छापेमारी
Enforcement Directorate ने अक्टूबर 2025 में पश्चिम बंगाल के 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई अहम दस्तावेज और करीब 45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे।
यह जांच Calcutta High Court के निर्देश पर दर्ज CBI FIR के आधार पर शुरू हुई थी।
चुनाव के दौरान मिला था समन
सुजीत बोस को विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ED का समन मिला था। उन्होंने चुनावी व्यस्तता का हवाला देते हुए अदालत से राहत मांगी थी। बाद में 1 मई को वह जांच एजेंसी के सामने पेश हुए थे।
कौन हैं सुजीत बोस?
सुजीत बोस उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि 2026 विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार शरदवत मुखर्जी से हार का सामना करना पड़ा।
Mamata Banerjee की सरकार में मंत्री रहे बोस कभी CPI(M) नेता सुभाष चक्रवर्ती के करीबी माने जाते थे, लेकिन बाद में वह TMC में शामिल हो गए थे।
क्या और नेताओं पर भी गिरेगी गाज?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कार्रवाई आगे और बड़े नेताओं तक पहुंच सकती है। नए मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari पहले ही TMC शासनकाल में कथित भ्रष्टाचार मामलों की जांच कराने की बात कह चुके हैं।