हिंदू धर्म में मां गंगा को मोक्षदायिनी और पापनाशिनी माना जाता है। मां गंगा से जुड़े दो प्रमुख पर्व हैं — गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा। कई लोग इन दोनों पर्वों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दोनों का महत्व और पौराणिक कथा अलग-अलग है।

क्या है गंगा सप्तमी?
गंगा सप्तमी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इसे गंगा जयंती या जाह्नवी सप्तमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का पुनर्जन्म हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि जाह्नु ने गंगा को अपने कमंडल में समा लिया था और बाद में उन्हें अपने कान से पुनः प्रकट किया। इसी कारण मां गंगा को जाह्नवी भी कहा जाता है।
क्या है गंगा दशहरा?
गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर पृथ्वी पर उतारा था।
गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा में मुख्य अंतर
गंगा सप्तमी मां गंगा के पुनर्जन्म का पर्व माना जाता है।
गंगा दशहरा मां गंगा के धरती पर अवतरण का उत्सव है।
गंगा सप्तमी वैशाख महीने में मनाई जाती है, जबकि गंगा दशहरा ज्येष्ठ महीने में पड़ता है।
गंगा दशहरा पर गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व माना गया है।
धार्मिक महत्व
मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने और दान-पुण्य करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। वहीं गंगा सप्तमी पर मां गंगा की पूजा और जल अर्पित करने से सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।