
Somnath Temple को हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला और सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंग माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि रहस्यमयी कथाओं और इतिहास की वजह से भी चर्चा में रहता है। इन्हीं में सबसे चर्चित दावा है कि कभी यहां का शिवलिंग हवा में तैरता था।
कई ऐतिहासिक और लोककथाओं में दावा किया गया है कि प्राचीन सोमनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग बिना किसी सहारे के हवा में लटका हुआ दिखाई देता था। कहा जाता है कि मंदिर की छत और दीवारों में शक्तिशाली चुंबकीय पत्थर यानी लोडस्टोन लगाए गए थे, जिनकी वजह से शिवलिंग हवा में संतुलित रहता था।
इतिहासकारों के अनुसार, 1025 ईस्वी में Mahmud of Ghazni ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। फारसी इतिहासकारों के लेखों में उल्लेख मिलता है कि उसने मंदिर के अंदर एक “हवा में तैरती मूर्ति” देखी थी, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते थे। बाद में मंदिर को तोड़ा गया और कथित रूप से चुंबकीय संरचना भी नष्ट कर दी गई।
हालांकि आधुनिक इतिहासकार और वैज्ञानिक इस कहानी को पूरी तरह प्रमाणित तथ्य नहीं मानते। कुछ शोधों में यह संभावना जताई गई है कि प्राचीन भारतीय वास्तुकारों ने चुंबकीय तकनीक और धातुओं के संतुलन का इस्तेमाल किया हो सकता है। एक रिसर्च पेपर में दावा किया गया कि लोहे-निकेल मिश्र धातु और चुंबकीय पत्थरों की मदद से ऐसा प्रभाव संभव हो सकता था, लेकिन इसके ठोस पुरातात्विक प्रमाण अभी तक नहीं मिले हैं।
सोशल मीडिया और लोककथाओं में आज भी “तैरते शिवलिंग” की कहानी काफी लोकप्रिय है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे ऐतिहासिक तथ्य और धार्मिक मान्यता के बीच समझना चाहिए।
सोमनाथ मंदिर का वर्तमान स्वरूप स्वतंत्र भारत में दोबारा बनाया गया था। आज भी लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इसे आस्था, पुनर्निर्माण और भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।