ईरान इस वक्त अपने सबसे गंभीर राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले करीब दो हफ्तों से देशभर में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं। हालात ऐसे बन चुके हैं कि अब सड़कों पर सिर्फ प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि सरकार समर्थक समूह भी आमने-सामने उतर आए हैं। इसी बीच अमेरिका ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपने नागरिकों को ईरान तुरंत छोड़ने की सलाह दी है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है।
186 शहरों तक फैला विरोध, सैकड़ों मौतों का दावा
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक ईरान में 28 दिसंबर को तेहरान से शुरू हुआ विरोध अब 186 से ज्यादा शहरों और कस्बों तक फैल चुका है। शुरुआत में ये प्रदर्शन महंगाई, बेरोजगारी और खराब आर्थिक हालात को लेकर थे, लेकिन अब यह आंदोलन सरकार और मौजूदा शासन व्यवस्था के खिलाफ खुला विद्रोह बन चुका है।
अमेरिका में स्थित एक मानवाधिकार संगठन का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक करीब 646 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। हालांकि ईरान सरकार ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है और स्वतंत्र रूप से इसकी जांच भी संभव नहीं हो पा रही है, क्योंकि देश में इंटरनेट और संचार सेवाओं पर भारी पाबंदियां लगी हुई हैं।
सड़कों पर बवाल, खामेनेई पर बढ़ता दबाव
ईरान की सड़कों पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। राजधानी तेहरान सहित कई बड़े शहरों में आगजनी, झड़पों और गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग अब सिर्फ आर्थिक सुधार तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे आजादी और शासन परिवर्तन की बात भी खुलकर कर रहे हैं। वहीं, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
सरकारी टेलीविजन का दावा है कि कुछ इलाकों में हालात काबू में हैं, लेकिन ज़मीनी रिपोर्ट्स इससे बिल्कुल उलट तस्वीर पेश कर रही हैं।
अमेरिका एक्शन मोड में, सैन्य विकल्पों पर विचार
ईरान में बढ़ती हिंसा को लेकर अमेरिका खुलकर सख्त रुख अपनाता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान के मामले में सभी विकल्प खुले रखे गए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि कूटनीति अमेरिका की पहली पसंद है, लेकिन जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान सरकार सार्वजनिक मंचों पर जो बयान दे रही है, निजी बातचीत में उसके संदेश अलग हैं, जिससे हालात और संदेहास्पद हो गए हैं।
अमेरिकी नागरिकों को सख्त चेतावनी
अमेरिका ने अपने नागरिकों से साफ शब्दों में कहा है कि वे तुरंत ईरान छोड़ दें। अमेरिकी वर्चुअल एंबेसी की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि प्रदर्शन हिंसक हो सकते हैं, गिरफ्तारियों और गोलीबारी का खतरा बना हुआ है।
एडवाइजरी में बताया गया कि:
- कई इलाकों में इंटरनेट पूरी तरह बंद है
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रभावित है
- कई सड़कें सील कर दी गई हैं
- अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या सीमित कर दी गई हैं
अमेरिका ने नागरिकों को सलाह दी है कि अगर संभव हो तो जमीनी रास्ते से आर्मेनिया या तुर्की जाने पर विचार करें और ऐसा प्लान बनाएं जिसमें अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न रहना पड़े।
ईरान की चेतावनी – हमला हुआ तो युद्ध के लिए तैयार
ईरान की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि ईरान किसी देश पर हमला करने का इरादा नहीं रखता, लेकिन अगर उस पर हमला किया गया तो वह पूरी ताकत से जवाब देगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान किसी भी संभावित युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रंप का ‘टैरिफ बम’, आर्थिक दबाव बढ़ा
तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर आर्थिक शिकंजा कसते हुए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि जो देश मौजूदा हालात में ईरान के साथ कारोबार करेंगे, उन पर 25 फीसदी तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर दी।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह टैरिफ किन देशों पर और किस तरीके से लागू किया जाएगा।
‘अब आजादी दूर नहीं’ – रजा पहलवी
ईरान के आखिरी शाह के बेटे और निर्वासन में रह रहे रजा पहलवी ने ईरानी जनता के नाम संदेश जारी कर कहा है कि देश की आजादी अब दूर नहीं है। उनके बयान को प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
ईरान के हालात सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहे हैं। अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व के कई देशों की नजरें इस संकट पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात काबू में नहीं आए, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है।
फिलहाल ईरान में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं और दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह संकट किस दिशा में जाता है।