
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि बातचीत के लिए पहुंच चुके हैं, लेकिन आपसी अविश्वास के कारण माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। यही वजह है कि इस वार्ता के परिणाम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की है। हालांकि यह अभी तय नहीं है कि बातचीत सीधे आमने-सामने होगी या किसी मध्यस्थ के जरिए।
ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि बातचीत शटल डिप्लोमेसी के तहत हो सकती है, जिसमें दोनों देश अलग-अलग कमरों में बैठकर किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से संवाद करते हैं।
इस वार्ता को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगर दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत होती है, तो यह कई दशकों बाद एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव होगा। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से अमेरिका और ईरान के संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे हैं और सीधी बातचीत बहुत कम हुई है।
वार्ता में सबसे बड़ी रुकावट दोनों देशों की शर्तें बन रही हैं। ईरान की मांग है कि लेबनान में युद्धविराम किया जाए और उसकी जमी हुई संपत्तियों को अमेरिका द्वारा वापस किया जाए। वहीं अमेरिका ने इन मांगों पर अभी तक स्पष्ट सहमति नहीं दी है और व्हाइट हाउस ने संपत्ति रिलीज की खबरों को खारिज कर दिया है।
कुल मिलाकर, यह वार्ता एक अहम मोड़ पर है। यदि यह सफल होती है तो मध्य पूर्व में शांति की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। वहीं असफल रहने पर क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।